यह गावं और आस-पास का ईलाका नक्शल प्रभावित था। कुछ ही दिन पहले प्रखंड कार्यालय और पंचायत भवन को नक्शालियों द्वारा ध्वस्त किया जा चूका था। एक मात्र प्राथमिक विद्यालय में पुलिस के जवान नक्शालियों को पकड़ने के लिए रुके हुए थे। अचानक रात को नक्शालियों ने पुलिस के जवानों पर आक्रमण कर दिया। वे संख्या में कम थे और नक्सालियों की संख्या ज्यादा थी। फलस्वरूप पुलिस को भागना पड़ा। दुसरे दिन मुख्यालय से अधिक संख्या में पुलिस के जवान उस गावं में आ गए और गावं के औरत-मर्द, बच्चे-बूढ़े, जवान सभी को बेतहाशा पीटने लगे। उनकी गलती यह था की वे नक्शालियों के आक्रमण के समय पुलिस की मदद के लिए क्यों नहीं आये थे। अर्थात गावं के लोग नक्शल समर्थक थे येही मान लिया गया और उनमे से बीस-पच्चिश को पकड़कर थाने लाया गया। उनमे से कुछ तो गाय-बकरी बेच कर या जो भी वे बेच सकते थे को बेच कर रुपये जुटाए और थाने में चढ़ावा देकर छुट गए। बाकि बचे लोग नक्शाली कहलाये और आज भी वे बिना किसी कारन के जेल में हैं और न जाने कब तक रहेंगे क्योंकि उनके पास बेचने के लिए कुछ भी नहीं था।
उनकी स्तिथि ऐसी है की यदि वे नक्शालियों का साथ देते हैं तो पुलिस उन्हें मारती-पिटती है और नक्शाली समर्थक कहकर जेल में डाल देती है। यदि वे पुलिस का साथ देती है तो नक्शाली उन्हें पुलिस का खबरी कहकर मार डालती है। अब ये साधन विहीन गावं वासी क्या करें? है आपके पास कोई जवाब ?
उनकी स्तिथि ऐसी है की यदि वे नक्शालियों का साथ देते हैं तो पुलिस उन्हें मारती-पिटती है और नक्शाली समर्थक कहकर जेल में डाल देती है। यदि वे पुलिस का साथ देती है तो नक्शाली उन्हें पुलिस का खबरी कहकर मार डालती है। अब ये साधन विहीन गावं वासी क्या करें? है आपके पास कोई जवाब ?