और कब तक, आप, आपस में लड़ते रहेंगे ?
एक दुसरे को कष्ट देते रहेंगे ?
अपने ही भाई बहनों, मातायों, बेटे-बेटियों की
हत्या करते रहेंगे?
क्या येहि सिखाया था?
पैगम्बरों ने?
कहीं ऐसा तो नहीं?
की, उनके उपदेशों को नहीं मानने के कारण,
उन्हीके उपदेशों को तोड़-मडोर कर
गलत अर्थ निकल कर
उपदेशों को अभिशाप बना लियें
और आपस में ही लड़कर कर मर रहे हैं,
आखिर कब तक?
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