"नमस्ते दीदी, कैसी हैं आप?"
"ठीक ही हूँ", - अचानक जोर से चिल्लाते हुए-" अरे बहु, क्या उह-आह लगा रखी है, जल्दी करो, कपडे धोकर बर्तन भी मांजने हैं, बहाना करने से नहीं चलेगा, एक तुम्ही बच्चा पैदा नहीं कर रही हो, हम भी किये हैं और सारे घर का काम करते हुए.... क्यों दीदी सच कह रहीं हूँ न?"
- बहु दर्द से छटपटाते हुए भी कपडे धोती रही।
- अन्दर के कमरे से एक और आवाज आ रही है-" ऊह..माँ..." "एक मिनट दीदी अभी आती हूँ" "...हाँ बेटी बहुत दर्द हो रहा है?" अब एक शरीर से दूसरा शरीर निकलना...दर्द तो होगा ही..तुम सोयी रहो, लाओ मैं पांव दबा दूँ, कुछ खाओगी?...मंगा दूँ ?
" नहीं मुझे कुछ भी खाने का मन नहीं कर रहा है"
" ना बेटी, ऐसा कहने से कैसे चलेगा, तू खाएगी तभी तो बच्चा स्वस्थ होगा?
"मम्मी जी, बहुत भूख लगी है, कुछ खा लूँ ?, फिर बर्तन मांज लुंगी" बहु कह रही है।
"हाँ-हाँ, देख रसोई में रोटी रखी है, गुर के साथ खा ले, देखना, पनीर रखा है, उसे छूना मत, वो मेरी बेटी के लिए है"
"ठीक ही हूँ", - अचानक जोर से चिल्लाते हुए-" अरे बहु, क्या उह-आह लगा रखी है, जल्दी करो, कपडे धोकर बर्तन भी मांजने हैं, बहाना करने से नहीं चलेगा, एक तुम्ही बच्चा पैदा नहीं कर रही हो, हम भी किये हैं और सारे घर का काम करते हुए.... क्यों दीदी सच कह रहीं हूँ न?"
- बहु दर्द से छटपटाते हुए भी कपडे धोती रही।
- अन्दर के कमरे से एक और आवाज आ रही है-" ऊह..माँ..." "एक मिनट दीदी अभी आती हूँ" "...हाँ बेटी बहुत दर्द हो रहा है?" अब एक शरीर से दूसरा शरीर निकलना...दर्द तो होगा ही..तुम सोयी रहो, लाओ मैं पांव दबा दूँ, कुछ खाओगी?...मंगा दूँ ?
" नहीं मुझे कुछ भी खाने का मन नहीं कर रहा है"
" ना बेटी, ऐसा कहने से कैसे चलेगा, तू खाएगी तभी तो बच्चा स्वस्थ होगा?
"मम्मी जी, बहुत भूख लगी है, कुछ खा लूँ ?, फिर बर्तन मांज लुंगी" बहु कह रही है।
"हाँ-हाँ, देख रसोई में रोटी रखी है, गुर के साथ खा ले, देखना, पनीर रखा है, उसे छूना मत, वो मेरी बेटी के लिए है"
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