वकौल एम्० जे० अकबर साहब.....
डॉ.बिनायक सेन जैसे लोगों को उम्रकैद की सजा सुना दी जाती है और डकैतों को wiलासितापूर्ण जीवन जीने की सुविधा दी जाती है। लुटेरों के चेहरों को लोगों के सामने लाने के लिए सरकार के ऊपर वर्षों तक दबाव बनाया जाता है। जब सरकार इन दवाबों को झेलती हुई कारर्वाई शुरू करती है, तब तक सभी सबूतों पर धुल जम जाती है। इस तरह देश की संपत्ति लुट रहे लुटेरे पाक साफ हो जाते हैं। ऐसे में इस बात की उम्मीद कोई बेवकूफ ही कर सकता है की उस घोटालों की जांच में आज कुछ भी निकल कर आये।
जब विनायक सेन को सजा मिलती है, तो यह सभी अख़बारों की सुर्खी बन जाती है, लेकिन जब सेन पर ट्रायल चल रहा था तब मीडिया कहाँ थी?
विनायक सेन जैसे लोगों की आवाज देशद्रोह और संसद के भीतर कुंडली मार कर बैठे सत्ता के दलाल की कारस्तानियाँ देश का सिर गर्व से ऊँचा उठानेवाली है?
आज अंतर यह है की जो लोग कमजोर की आवाज हैं, वे देशद्रोही हैं, और जो लोग उन्ही कमजोरों के पैसों पर मलाई खा रहे है, वे देश चलनेवाले है। अगर इनको जेलों में भरा जाने लगा, तो देश के जेलों में जगह नहीं बचेगी, इस बात से इनकार किया जा सकता है क्या?
आतंकवादी और नक्सलवादी तो पहचान लिए जा रहे है, लेकिन उनको कौन पहचानेगा, जो सत्ता में छिपे आतंकवादी हैं ?
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