वे हमें बताते हें , की
क्या करना चाहिए,
क्योंकि
वे माननीय हैं,
भूलते हैं वे, की
हमने ही बनाया था उन्हें, 'माननीय'
वे हमें बताते हैं, की कौन सी दवा
हमारे सेहत के लिए ठीक है
और कौन सी नहीं
हमें स्वस्थ रहने के लिए
'योगा'
करना चाहिए की नहीं
किसे योग विद्या आती है, किसे नहीं,
कितने निर्लज्ज हैं वे?
जो हमारे ही द्वारा बनाये गए है, और
हमारे ही कारन ऐश की जिदगी जी रहे हैं
क्या उन्हें ये शोभा देता है?
उन्हें ये पता होना चाहिए था
की
उनकी अकर्मण्यता, काहिली
निर्ल्ज्ज़ता, chatukarita और बरबोलापन
के कारण दिनों दिन गरीबी, बेरोज़गारी, महंगाई
सुरसा की तरह बढ़ता ही जा रहा है
ऐसी किसी बात पर
वे कुछ भी नहीं बोल पते
और बोलते भी हैं
तो बकवाश करते हैं।
कभी कभी तलवे चाटने
से उन्हें फुरसत
मिल जाए, तो फिर उनसे
पूछा जायेगा की
उनकी उपलब्धि कमसे कम itni to hai
की लोग उन्हें पूजा करते है
क्योंकि उनसे उन्हें मिला है जीवन को निरोग जीने की कला
आपसे क्या सिख पाया आम जनता
अबतक आपने मानव कल्याण के लिए क्या किया?
इश्वर न करे,
आप जब दिवंगत होंगे
तो आपको याद करने वाला कितने होंगे
और
यदि उन्हें कुछ हो गया तो?
लोग उन्हें आगामी वर्षों याद रखेंगे,
इसलिए हुजुर
जरा सोचिये
और बकवाश न करके,
जिसके लिए,
आप माननीय हैं
उनके लिए ,
कुछ ऐसा कीजिये
ताकि लोग आपको भी वर्षों याद रखें!!.
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