Saturday, December 31, 2011

कल और आगामी कल

कल जब बीत जायेगा तब हमारे लिए कुछ यादें छोड़ जायेगा। जिसमे से कुछ को हम याद रखना चाहेंगे और कुछ को भूलना। कुछ के साथ तो रहना ही परेगा। जैसे महंगाई, बे-रोजगारी, भ्रस्ताचार, घूसखोरी, बदतमीजी आदि आदि ... फिर भी २०११ के अंतिम दिन अच्छा गुजरे, येही कामना करते हुए उन महान व्यक्तियों को याद करेंगे जिन्होंने अपने गुंणों द्वारा मानवता को खुशियाँ दी। पंडित भीमसेन जोशी, एम्.ऍफ़.हुसेन, उस्ताद रहीम फहीमुद्दीन खान डागर, शम्मी कपूर, नवाब मंसूर अली खान पटौदी, स्टीव जाब्स, जगजीत सिंह, भूपेन हजारिका, हरगोबिन्द खुराना, देव आनंद, कोरिया के शशक किम जोंग इल के साथ साथ विभिन्न प्राकृतिक और अन्य कारोनों से असमय ही इस दुनिया को छोड़ कर चले गए उन्हें भी याद करेंगे। साथ ही उन हादसों को भूलना भी चाहेंगे। भ्रस्ताचार से लड़ना चाहेंगे, सुरुवात हो गयी है इस साल का सबसे अछि बात जब एक मुद्दे को लेकर पूरा देश एकमत हुआ और एक नयी सुरुवात हो गयी। दुनिया के कई अन्य देशों में भी अन्याय के खिलाफ आन्दोलन हुआ और जनता की जीत हुई। २८ साल बाद हमारा देश फिर एक बार क्रिकेट का वर्ल्ड कप जीत कर लाया। ११ मार्च जापान में सुनामी नमक हादसे के बाद सारा देश बर्बादी के कगार पर था, लेकिन जापानी एक बार फिर अपने को साबित किया और वरस बीतने नहीं पाया जापान जैसा था उससे भी ज्यादा सुन्दर हो गया, जैसे प्रकृति को मानव कहा रहा हो की चाहे तुम चाहे जितनी बार हमें गीरायो हम फिर उठ खड़े होंगे। हजारों या शायद लाखों का हत्यारा, मानवता का दुश्मन ओसामा बिन लादेन को मार डाला गया। इस वर्ष कुछ इमानदार लोगों के कारन कई भ्रष्ट्राचार उजागर हुए . भ्रष्ट्राचार के आरोप में कई शक्तिशाली नेतायों को जेल जाना पड़ा। कई मुद्दों पड जनता अपनी विरोध जताया। कई नई कानून बनाने के लिए संसद पर दवाव बनाया गया। भ्रष्ट्राचार के अंत के लिए 'लोकपाल विधेयेक पारित करने को कहा गया और वोह शायद पारित हो भी जाएगी। लेकिन ये सरकारी विधेयक होगी क्योंकि जनता के कम ही मांगो को ध्यान में रखा गया है। इस विधेयक के अधिकतर बिंदु उनके सुबिधा के लिए छोड़ दिए गए हैं। जिसमे से एक अहम् मांग थी सी बी आई को स्वंत्र संगठन बनाया जाना। जो किसी मंत्रालय के अधीन नहीं रहेगा। अन्ना जे का ये आन्दोलन सभी को याद रहेगा। जब देश के बच्चे बच्चे ने कहना सुरु किया मई भी अन्ना। बाकि फिर कभी..........

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