Sunday, October 3, 2010

दामाद

-नमस्ते दीदी, सब ठीक हैं न? ये अभी अंदर कौन गए? दामादजी थे क्या ?
-हाँ दीदी, दामादजी ही तो थे। किसी की नज़र न लगे, मेरा दामाद तो हीरा है हीरा। देखिये मेरे और उनके लिए दवा लाना था और सब्जी भी। दामाद जी को एक फ़ोन किया और सारा सामान घर पर आ गया। जब भी कोई जरुरत होता है तो उन्हें फ़ोन करते ही आ जाते है।
- बहुत अच्छी बात है दीदी। लेकिन मनु बेटा को नहीं देख रही हूँ। घर पर नहीं है क्या ? आज तो छुट्टी है न?
- मत कहिये दीदी, मेरा बेटा तो नालायक, कुलांगार है। जब देखो ससुराल में ही पड़ा रहता है, और वहां का काम करता रहता है।

No comments:

Post a Comment