आज सुबह का समाचार पढ़ कर बहुत दिनों के बाद बेहद ख़ुशी महसूस किया।
हमारे शहर रांची के एक अत्यंत साधारण गरीब परिवार की लड़की दीपिका Commenwealth गेम्स के तीरंदाजी के एकल स्पर्धा में भी स्वर्ण जीत कर केवल इस शहर का ही नहीं पुरे राज्य, देश और अपने परिवार का नाम रौशन कर दिखाया। १७ वर्ष की इस लड़की के जूनून को संपूर्ण अंतर्मन से "शाबाश दीपिका" कहता हूँ। साथ ही उसके माता-पिता को भी पुरे दिल से नमस्कार कहना चाहता हूँ, अपनी पुत्री को आगे ले जाने में उनका त्याग और योगदान लाखों माता- पितावों को प्रेरणा देने में सहायक होगा। साथ ही उन लड़के-लड़कियों को भी यह सिख मिलेगा की लक्ष्य को हासिल करने के लिए यदि जूनून हो तो कोई गरीबी या धन की कमी आड़े नहीं आ सकता।
एन0 रघुरमण के कथनानुसार राष्ट्रमंडल खेलों में शिरकत करने वाले भारतीय खिलाडियों में से ९० प्रतिशत खिलाडी निम्न मध्य वर्ग या निम्न आय वर्ग से आते हैं। खेल सुविधायों का पुर्णतः अभाव और तमाम मुश्किलों के बावजूद ये खिलाडी सिर्फ खेल के प्रति अपने जूनून और समर्पण के बल पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्टार तक पहुंचे है। काश हमारी सरकार इन्हें वे सुविधाएं और प्रोत्साहन देते तो ओल्य्म्पिक में भी ये होनहार खिलाडी निश्चित ही स्वर्ण पदक का अम्बार लगा सकतें हैं। जय हो जूनून और समर्पण की।
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