पडोश के दोस्त के पास एक तगर देशी कुत्ता था। घर के सामने एक छोटा सा खुला जगह था जहाँ मेरा दोस्त सब्जिय उगता था। और उसके पहरेदारी करता था वह कुत्ता। समय के साथ साथ कुत्ता बुध हो गया साथ ही उसके प्रति दोस्त का प्यार भी सायद घाट चूका था। जो भी हो अब उस कुत्ते को भरपेट खाना भी नहीं जुटता था। तबतक एक कम उम्र का जवान कुत्ता आ चूका था। उसका देख भाल खाना पीना पर दोस्त काफी ख्याल रहता था।
एक दिन दोस्त की बहन आँगन में खुली चूल्हे पर रोटियां सेंक रही थी। दोनों कुत्ता पास ही बैठ कर रोटियों को ललचाई दृष्टि से देख रहा था।बुड्डा कुत्ता जानता था की उसे शायद ही गरम गरम एक रोटी मिल जाये।पोलिना एक गरम रोटी सेंक कर कुत्तों के तरफ उछाला जवान कुत्ता ने उसे उठाया और बुड्डे कुत्ते के पास जाकर रख आया। क्योंकि उसे पता था की दूसरा रोटी उसे निश्चित ही मिलेगा।
मैंने दोस्त से कहा अभी क्या हुआ देखा? वह इस घटना पर ध्यान नहीं दिया था। इसलिए मैंने साडी घटना को उसे बताया। उसने आश्चर्य भरी नज़रो से देख कर केवल इतना ही कहा- शंकर , यार आदमी से कुत्ता भला।
afsar ka kutta mar gya. nagar bhar e log aaye shok jatane. ek din afsar mar gya koi nahi aaya. narayan narayan
ReplyDeleteएक अच्छा और नैतिकता को बढ़ावा देता प्रसंग.
ReplyDeleteकुत्ते के बारे में अब तक "लालची कुत्ते" की ही कथा पढी थी.
लेकिन आपने कुत्ते के त्याग पक्ष से भी परिचित करवाया. आभार.
sach hai hum kuchh seekhen to inse.. हिन्दी ब्लॉगजगत में आपका स्वागत है..ऐसी ही सुन्दर पोस्टों से हिन्दी ब्लॉग को समृद्ध करते रहिये.. नवरात्र और दशहरे की शुभकामनाएं..
ReplyDeleteअच्छी जानकारी ! बिजया दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं !
ReplyDelete